केरल: बीमारी के बावजूद छुट्टी न मिलने और लगातार काम के दबाव के बीच साउथ अफ्रीका में एक 29 साल की महिला कर्मचारी की ऑफिस में मौत का मामला सामने आया है। रोजबैंक स्थित कार्ट ट्रैक कंपनी में सेंटर एजेंट के तौर पर काम करने वाली सीना धलधला लंबे समय से बीमार थीं। परिवार का आरोप है कि उन्होंने सिक लीव के लिए दो बार आवेदन किया, लेकिन दोनों बार उनकी छुट्टी मंजूर नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि सीना की तबीयत लगातार खराब थी। उनके साथ काम करने वाले कर्मचारियों के मुताबिक, मौत से एक दिन पहले वह घुटनों के बल बैठकर रो रही थीं और कह रही थीं कि उनकी हालत बहुत खराब है, फिर भी उन्हें अगले दिन ऑफिस आने की बात कही गई। जिस दिन उनकी मौत हुई, टीम लीडर से मिलने के बाद जब वह वापस आईं तो काफी परेशान थीं। कुछ समय बाद साथी कर्मचारियों को वह ऑफिस के वॉशरूम में बेहोश मिलीं।
परिवार ने आरोप लगाया कि समय रहते उन्हें मेडिकल मदद नहीं मिली। सीना की आंटी ने बताया कि उन्हें खुद प्राइवेट हॉस्पिटल से एंबुलेंस बुलानी पड़ी। परिवार का कहना है कि कंपनी के मैनेजमेंट ने इलाज को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई और पॉलिसी का हवाला देकर उनकी परेशानी को नजरअंदाज किया गया।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कॉर्पोरेट वर्क कल्चर, कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव और मेडिकल लीव पॉलिसी को लेकर बहस छिड़ गई है। लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या काम का दबाव इंसानी जिंदगी से ज्यादा जरूरी हो सकता है।
ऐसा ही एक मामला साल 2024 में भारत के बेंगलुरु में भी चर्चा में आया था, जहां 25 साल की सीए एना सबेस्टियन की मौत के बाद कंपनी के वर्कलोड और टॉक्सिक वर्क कल्चर पर सवाल उठे थे। इन घटनाओं ने एक बार फिर कंपनियों की जिम्मेदारी और कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है।
